Varuthini Ekadashi Vrat Katha वरुथिनी एकादशी कथा सुनें।

Varuthini Ekadashi Vrat Katha

Varuthini Ekadashi Vrat Katha: एकादशी का व्रत शास्त्रों में बेहद ख़ास और बहुत मान्यता रखता है। प्रत्येक मास में कृष्ण और शुक्ल पक्ष को मिलाकर 2 एकादशी पड़ती है जिनका अपना ही ख़ास और विशेष महत्व ‘varuthini ekadashi significance’ है। शास्त्रों में बैशाख मॉस में आने वाली एकादशी को वरुथिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। आज हम आपको बैशाख महीने ‘Varuthini Ekadashi Vrat Katha’ की वरुथिनी एकादशी व्रत तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त पूजा विधि उपाय और इस व्रत वरुथिनी एकादशी की कथा के बारे में बताएँगे।

 

वरुथिनी एकादशी व्रत शुभ मुहूर्त

  1. साल 2022 में बरूथिनी एकादशी का व्रत 6 अप्रैल मंगलवार को रखा जायेगा|
  2. एकादशी तिथि प्रारम्भ होगी – 26 अप्रैल, प्रातःकाल 01:37 मिनट पर।
  3. एकादशी तिथि समाप्त होगी – 27 अप्रैल प्रातःकाल 12:47 मिनट पर।
  4. एकादशी व्रत के पारण का समय होगा – 27 अप्रैल प्रातःकाल 6:41 से 8:32 मिनट तक।

वरुथिनी एकादशी कथा

Varuthini Ekadashi Vrat Katha

महाभारत काल में एक समय भगवान श्रीकृष्ण से युधिष्ठिर ने वरुथिनी एकादशी व्रत के महत्व को बताने का निवेदन किया था भगवान श्री कृष्ण ने बताया कि वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी ही वरुथिनी एकादशी को कहा जाता है इस व्रत को करने से पुण्य की प्राप्ति होती है उन्होंने वरुथिनी एकादशी की कथा को इस कथा के माध्यम से बताएं।

Varuthini Ekadashi Vrat Katha: एक समय में नर्मदा नदी के तट पर राजा मांधाता राज्य करते थे. वह धर्मात्मा एवं दानी व्यक्ति थे. एक बार वे जंगल के पास तपस्या कर रहे थे. तभी वहां एक भालू आया और उनके पैर को चबाने लगा. फिर वह राजा को घसीट कर जंगल में ले गया. इस दौरान राजा की तपस्या भंग हो गई और वे घायल हो गए।

उन्होंने भगवान विष्णु को मन ही मन ध्यान करके अपने प्राणों की रक्षा की प्रार्थना की. तब भगवान विष्णु प्रकट हुए और अपने चक्र से उस भालू को मारकर राजा मांधाता के प्राणों की रक्षा की. भालू के हमले में राजा मंधाता अपंग हो गए थे, इस वजह से वे दुखी और कष्ट में थे. उन्होंने भगवान विष्णु से इस शारीरिक और मानसिक पीड़ा को दूर करने का उपाय पूछा।

  • तब श्रीहरि ने कहा कि यह तुम्हारे पूर्वजन्म के अपराध का फल है. तुमको मथुरा में वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी का व्रत रखना होगा और मेरे वराह अवतार की पूजा करनी होगी. उसके पुण्य प्रभाव से ही कष्ट और दुख दूर होंगे।
  • भगवान विष्णु के बताए अनुसार राजा मांधाता मथुरा पहुंच गए और विधिपूर्वक वरुथिनी एकादशी का व्रत रखा और वराह अवतार की पूजा की. इस व्रत के पुण्य फल से राजा मांधाता के कष्ट और दुख दूर हो गए, वे फिर से शारीरिक तौर पर अच्छे हो गए. उनको भगवान विष्णु की कृपा से स्वर्ग की प्राप्ति भी हुई।